बाल विकास की अवधारणा
बाल विकास हर शिक्षक भर्ती परीक्षा का सर्वाधिक भार वाला खंड है, और प्रश्न बच्चों के बारे में राय नहीं, पारिभाषिक शब्दों की सटीकता माँगते हैं। वृद्धि और विकास पर्यायवाची नहीं हैं; परिपक्वता अधिगम नहीं है। शब्दावली ठीक-ठीक जान लेना ही अधिकांश अंक है।
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बाल विकास — सही या गलत?
6 कथन · प्रति कथन 12 सेकंड
वृद्धि बनाम विकास
| वृद्धि | विकास | |
|---|---|---|
| प्रकृति | मात्रात्मक | गुणात्मक |
| माप | कद, भार — मापने योग्य | व्यवहार, क्षमता — देखने योग्य |
| समाप्त? | परिपक्वता पर रुक जाती है | जीवनभर चलता है |
| उदाहरण | बच्चे का कद 5 सेमी बढ़ा | बच्चा तर्क करना सीखा |
वृद्धि विकास का ही एक भाग है। हर परीक्षा इस भेद पर कम-से-कम एक प्रश्न रखती है, प्रायः कोई उदाहरण देकर पूछती है कि यह क्या है।
विकास के सिद्धांत
- मस्तकाधोमुखी — सिर से नीचे पैरों की ओर
- केंद्रमुखी — केंद्र से बाहर सिरों की ओर
- निरंतरता — क्रमिक व सतत, छलांगों में नहीं
- वैयक्तिक भिन्नता — क्रम वही, गति भिन्न
- एकीकरण — भाग मिलकर पूर्ण, समन्वित क्रियाएँ बनते हैं
- सामान्य से विशिष्ट — उंगलियों से पकड़ने से पहले पूरी बाँह हिलाना
उदाहरण छाँटिए
यह वृद्धि है या विकास?
0/6बच्चे की शब्दावली अधिक जटिल हुई
इसे किस श्रेणी में रखेंगे?
अवस्थाएँ, आयु के अनुसार
विधि, क्रम से
सिद्धांत को उसके अर्थ से मिलाइए
त्वरित संदर्भ
परीक्षा सुझाव: जब कोई विकल्प कहे कि विकास "सभी बच्चों में समान" होता है, तो वह गलत है। जब कहे कि क्रम समान है पर गति भिन्न, तो वह सही है। यही एक भेद कई प्रश्न तय कर देता है।