अधिगम के सिद्धांत
अधिगम व्यवहार में अनुभव या अभ्यास के परिणामस्वरूप होने वाला अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन है। परिपक्वता, थकान, बीमारी या औषधि से हुए परिवर्तन अधिगम नहीं हैं। अधिगम के सिद्धांत यह बताते हैं कि यह परिवर्तन कैसे होता है। ये दो वर्गों में आते हैं: व्यवहारवादी (अधिगम = उद्दीपन-अनुक्रिया बंध) व संज्ञानात्मक (अधिगम = आंतरिक मानसिक पुनर्गठन)।
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सिद्धांतों को उनके वर्ग में छाँटें
1. प्रयास व त्रुटि — थॉर्नडाइक (संबंधवाद)
अधिगम प्रयास व त्रुटि द्वारा उद्दीपन व अनुक्रिया के बीच बंध बनने से होता है। यह उनके बिल्ली–पहेली बॉक्स प्रयोग पर आधारित है।
थॉर्नडाइक के अधिगम नियम:
| नियम | अर्थ |
|---|---|
| तत्परता का नियम | अधिगमकर्ता मानसिक रूप से तैयार हो |
| अभ्यास का नियम | पुनरावृत्ति/अभ्यास बंध को मजबूत करता है |
| प्रभाव का नियम | संतोष के बाद वाली अनुक्रिया स्थिर हो जाती है |
2. शास्त्रीय अनुबंधन — पावलव
साहचर्य द्वारा अधिगम। उनका कुत्ता–घंटी–भोजन प्रयोग:
उनके कुत्ता–घंटी–भोजन प्रयोग को एक-एक चरण करके देखें — पूरा सिद्धांत इन चार चरणों के क्रम में ही निहित है:
- भोजन (अस्वाभाविक उद्दीपन) → लार (अस्वाभाविक अनुक्रिया)
- घंटी (तटस्थ) + भोजन → लार
- अनुबंधन के बाद: अकेली घंटी (अनुबंधित उद्दीपन) → लार (अनुबंधित अनुक्रिया)
मुख्य अवधारणाएँ: सामान्यीकरण, विभेदीकरण, विलोपन, स्वतःपुनर्लाभ। संवेग/अभिवृत्ति अधिगम का आधार।
3. क्रिया-प्रसूत अनुबंधन — स्किनर
परिणामों द्वारा अधिगम। पुनर्बलन के बाद वाला व्यवहार दोहराया जाता है; दंड के बाद वाला व्यवहार घटता है। स्किनर बॉक्स (चूहा/लीवर) पर आधारित।
| प्रकार | व्यवहार पर प्रभाव |
|---|---|
| सकारात्मक पुनर्बलन | सुखद उद्दीपन जोड़ें → व्यवहार ↑ |
| नकारात्मक पुनर्बलन | अप्रिय उद्दीपन हटाएँ → व्यवहार ↑ |
| दंड | अप्रिय जोड़ें/सुखद हटाएँ → व्यवहार ↓ |
स्किनर के विचारों से अभिक्रमित अधिगम व शिक्षण मशीनें विकसित हुईं।
4. सूझ द्वारा अधिगम — गेस्टाल्ट (कोहलर)
संबंधों की अचानक समझ ("अहा!" क्षण) से अधिगम, प्रयास-त्रुटि से नहीं। कोहलर के वनमानुष (सुल्तान) प्रयोग (छड़ी व बक्से)। भागों से पहले संपूर्ण का प्रत्यक्षीकरण होता है।
5. सामाजिक/अवलोकनात्मक अधिगम — बंडूरा
मॉडल का अवलोकन व अनुकरण करके अधिगम। प्रसिद्ध बोबो गुड़िया प्रयोग। चार प्रक्रियाएँ: ध्यान → धारणा → पुनरुत्पादन → अभिप्रेरणा।
त्वरित तुलना
किसी सिद्धांत को चुनकर उसका पूरा विवरण देखें — या तुलना दबाकर किन्हीं दो को आमने-सामने रखें। शास्त्रीय बनाम क्रिया-प्रसूत की तुलना इस विषय में सबसे अधिक पूछी जाती है।
| सिद्धांत | प्रवर्तक | मूल विचार | प्रयोग |
|---|---|---|---|
| प्रयास व त्रुटि | थॉर्नडाइक | उद्दीपन-अनुक्रिया बंध | बिल्ली/पहेली बॉक्स |
| शास्त्रीय अनुबंधन | पावलव | साहचर्य | कुत्ता/घंटी |
| क्रिया-प्रसूत | स्किनर | परिणाम | चूहा/स्किनर बॉक्स |
| सूझ | कोहलर | अचानक समझ | वनमानुष/छड़ी |
| अवलोकनात्मक | बंडूरा | अनुकरण | बोबो गुड़िया |
परीक्षक की सबसे प्रिय कड़ी है सिद्धांतकार ↔ प्रयोग। इसे तब तक दोहराएँ जब तक यह स्वतः याद न हो जाए:
बंडूरा की चार प्रक्रियाएँ क्रम में याद होनी चाहिए — इन्हें लगाएँ:
परीक्षा सुझाव: प्रवर्तक ↔ प्रयोग ↔ मूल अवधारणा को मिलाएँ। "प्रभाव का नियम" (थॉर्नडाइक) स्किनर के पुनर्बलन का वैचारिक पूर्वज है।