अशाब्दिक तर्कशक्ति व दर्पण प्रतिबिंब
अशाब्दिक तर्कशक्ति में शब्दों की जगह आकृतियाँ होती हैं, इसलिए भाषा कभी बाधा नहीं बनती — और ठीक इसीलिए ये अंक हर अभ्यर्थी के लिए जीतने योग्य हैं। इसका लगभग सारा भाग तीन बातों पर सिमट जाता है: क्या घूमा, क्या पलटा, और हर चरण पर क्या जुड़ा या घटा।
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अशाब्दिक तर्कशक्ति — सही या गलत?
6 कथन · प्रति कथन 12 सेकंड
हर आकृति से पूछने योग्य तीन प्रश्न
| पूछिए | क्या देखें |
|---|---|
| क्या वह घूमी? | कोण व दिशा नोट कीजिए — 90° दक्षिणावर्त, 180°, आदि |
| क्या वह पलटी? | पलटाव दिशा-क्रम उलटता है; घूर्णन नहीं |
| क्या कोई गिनती बदली? | हर चरण पर रेखाएँ, बिंदु या भुजाएँ जुड़ीं/घटीं |
इन्हें एक-एक करके देखिए। पूरे रूपांतरण को एक साथ देखने की कोशिश ही इन प्रश्नों को कठिन बना देती है।
अक्षरों को दर्पण सममिति के अनुसार छाँटिए
क्या यह अक्षर ऊर्ध्व दर्पण में बदलता है?
0/6R
इसे किस श्रेणी में रखेंगे?
गिनिए कि मोड़ने से क्या होता है
मोड़, छेद व घूर्णन
1/3कागज़ को एक बार मोड़कर एक छेद किया जाता है। खोलने पर कितने छेद होंगे?
5
विधि, क्रम से
क्रिया को उसके प्रभाव से मिलाइए
त्वरित संदर्भ
परीक्षा सुझाव: पूरी आकृति के बजाय एक तत्व का पीछा पूरी श्रृंखला में कीजिए। जो अभ्यर्थी सब कुछ एक साथ देखने की कोशिश करते हैं, उन्हीं को अशाब्दिक प्रश्न धीमे लगते हैं।