राजस्थान की राजव्यवस्था व अर्थव्यवस्था
दो भाग: राज्य की संवैधानिक व्यवस्था, तथा उसकी अर्थव्यवस्था। राजव्यवस्था वाला भाग अत्यधिक अनुमानित है — हर वर्ष वही पद, वही संख्याएँ, और वही "किसकी नियुक्ति कौन करता है" वाले प्रश्न। अतः इस पृष्ठ को पढ़ें नहीं। इस पर काम करें। नीचे का हर भाग पहले आपसे उत्तर माँगता है।
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राज्य की राजव्यवस्था: संरचना
पंचायती राज — राजस्थान की विशिष्ट पहचान
राजस्थान भारत में पंचायती राज लागू करने वाला प्रथम राज्य था, जिसका उद्घाटन पंडित नेहरू ने 2 अक्टूबर 1959 को नागौर में किया। यह पूरे विषय का सर्वाधिक पूछा जाने वाला तथ्य है।
तीनों स्तरों को नीचे से ऊपर की ओर बनाएँ:
इस संरचना की सिफारिश बलवंत राय मेहता समिति ने की थी, और 73वें संविधान संशोधन (1992) ने राष्ट्रीय स्तर पर पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा दिया।
राज्य की संस्थाएँ
- राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) — अजमेर में, स्थापना 1949। यही आयोग यह परीक्षा आयोजित करता है।
- राज्य मानवाधिकार आयोग, राज्य निर्वाचन आयोग व राज्य सूचना आयोग — जयपुर।
- लोकायुक्त — लोक सेवकों के विरुद्ध शिकायतों की जाँच करता है।
अर्थव्यवस्था
राजस्थान की अर्थव्यवस्था तीन स्तंभों पर टिकी है: कृषि (सबसे बड़ा नियोक्ता), खनिज (वास्तविक तुलनात्मक लाभ), और पर्यटन।
प्रत्येक स्थान को उसकी वास्तविक पहचान के अनुसार छाँटें — परीक्षा इसे ठीक इसी रूप में पूछती है:
खनिज — राज्य की प्रमुख शक्ति
- जस्ता व सीसा — राजस्थान व्यावहारिक रूप से भारत का एकमात्र उत्पादक है। जावर (उदयपुर) ऐतिहासिक जस्ता खान है।
- संगमरमर — मकराना (नागौर), ताजमहल में प्रयुक्त।
- ताँबा — खेतड़ी (झुंझुनूं), "ताम्र नगरी"।
- जिप्सम, रॉक फॉस्फेट व चाँदी — राजस्थान राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी।
कृषि व उद्योग
- बाजरा, सरसों, ग्वार व जौ — इनमें राजस्थान भारत में अग्रणी है; सरसों का उत्पादन सभी राज्यों में सर्वाधिक है।
- इंदिरा गांधी नहर ने उत्तर-पश्चिम की खेती बदल दी।
- रबी (गेहूँ, सरसों, चना) व खरीफ (बाजरा, ज्वार, ग्वार) ऋतुएँ।
- वस्त्र, सीमेंट, संगमरमर प्रसंस्करण व हस्तशिल्प उद्योग में प्रमुख हैं।
परीक्षा सुझाव: प्रथम पंचायती राज राज्य = राजस्थान, नागौर, 2 अक्टूबर 1959। विधानसभा = 200 सीटें, एक-सदनीय। उच्च न्यायालय = जोधपुर (खंडपीठ जयपुर)। आरपीएससी = अजमेर, 1949। संगमरमर = मकराना; ताँबा = खेतड़ी; जस्ता = जावर।