1857 की क्रांति व राजस्थान का एकीकरण

इस विषय में दो अलग-अलग कथाएँ हैं, और परीक्षा दोनों से प्रश्न लेती है: राजस्थान की रियासतों में 1857 का विद्रोह, तथा 1948 से 1956 के बीच उन 22 रियासतों का एकीकरण, जिससे आज का राजस्थान बना।

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राजस्थान में 1857

1857 में राजपूताना में 22 रियासतें थीं, जो ए.जी.जी. (गवर्नर-जनरल का एजेंट) जॉर्ज पैट्रिक लॉरेंस के राजनीतिक नियंत्रण में थीं, जिनका मुख्यालय अजमेर था। छह सैनिक छावनियाँ थीं: नसीराबाद, नीमच, एरिनपुरा, देवली, ब्यावर व खेरवाड़ा

महत्वपूर्ण बात यह कि शासक अंग्रेजों के साथ रहे जबकि सिपाहियों ने विद्रोह किया — यहाँ विद्रोह सैनिकों व आम जनता का था, रियासतों का नहीं।

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प्रमुख व्यक्ति व स्थान:

  • नसीराबाद (28 मई 1857) — राजस्थान में पहला विस्फोट।
  • आउवा (पाली) — प्रतिरोध का सबसे प्रबल केंद्र। आउवा के ठाकुर खुशाल सिंह ने ब्रिटिश सेना को पराजित किया; पॉलिटिकल एजेंट मॉन्क मेसन यहीं मारा गया।
  • तात्या टोपे ने राजस्थान में प्रवेश कर 1858–59 तक संघर्ष जारी रखा।
  • लासानी संत तथा कोटा विद्रोह (जहाँ सिपाहियों ने महाराव के विरुद्ध नगर पर अधिकार बनाए रखा) भी प्रायः पूछे जाते हैं।

एकीकरण: सात चरण

1947 के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल व वी.पी. मेनन ने लगभग आठ वर्षों में सात चरणों में 22 रियासतों को एक राजस्थान में मिलाया। प्रथम, सबसे बड़ा व अंतिम चरण याद करना सर्वाधिक उपयोगी है।

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चरणतिथिनामराजधानी
118 मार्च 1948मत्स्य संघअलवर
225 मार्च 1948राजस्थान संघकोटा
318 अप्रैल 1948संयुक्त राजस्थानउदयपुर
430 मार्च 1949वृहत् राजस्थानजयपुर
515 मई 1949संयुक्त वृहत् राजस्थानजयपुर
626 जनवरी 1950राजस्थान राज्यजयपुर
71 नवंबर 1956वर्तमान राजस्थानजयपुर

सर्वाधिक पूछे जाने वाले तथ्य

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परीक्षा सुझाव: प्रथम विस्फोट = नसीराबाद; प्रबलतम प्रतिरोध = आउवा। राजस्थान दिवस = 30 मार्च 1949 (वृहत् राजस्थान)। कुल चरण = सात, समाप्ति 1 नवंबर 1956। चौथे चरण से जयपुर राजधानी है।


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