कला, संस्कृति, मेले व त्योहार
राजस्थान की संस्कृति — चित्रकला, स्थापत्य, मेले, त्योहार व शिल्प — बहुत अंक दिलाने वाला क्षेत्र है। वस्तुओं को उनके स्थानों से मिलाने पर ध्यान दें।
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शिल्पों को उनके मूल स्थान के अनुसार छाँटें
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लघुचित्रण की शैलियाँ
| शैली | केंद्र |
|---|---|
| मेवाड़ | उदयपुर, नाथद्वारा (पिछवाई चित्र) |
| मारवाड़ | जोधपुर, बीकानेर, किशनगढ़ |
| किशनगढ़ | बणी-ठणी ("भारत की मोनालिसा") हेतु प्रसिद्ध |
| ढूँढाड़ | जयपुर, आमेर |
| हाड़ौती | कोटा, बूँदी (शिकार दृश्य) |
मेले
| मेला | स्थान |
|---|---|
| पुष्कर मेला | अजमेर (ऊँट मेला, कार्तिक पूर्णिमा) |
| नागौर पशु मेला | नागौर |
| कोलायत मेला | बीकानेर |
| बेणेश्वर मेला | डूंगरपुर ("आदिवासियों का कुंभ", भील मेला) |
| मल्लीनाथ मेला | बाड़मेर (तिलवाड़ा) |
त्योहार
- गणगौर — गौरी (शिव-पार्वती) हेतु महिलाओं का पर्व; जयपुर/उदयपुर में प्रमुख।
- तीज — मानसून का स्वागत (जयपुर की तीज प्रसिद्ध)।
- मारवाड़ महोत्सव (जोधपुर), मरु महोत्सव (जैसलमेर), हाथी महोत्सव (जयपुर), मेवाड़ महोत्सव (उदयपुर)।
शिल्प व वस्त्र
- बंधेज/बांधनी, लहरिया, ब्लू पॉटरी (जयपुर), थेवा कला (प्रतापगढ़), उस्ता/मीनाकारी (बीकानेर), कोटा डोरिया साड़ियाँ।
स्थापत्य
- दिलवाड़ा मंदिर (माउंट आबू) — उत्कृष्ट जैन संगमरमर नक्काशी।
- सिटी पैलेस, लेक पैलेस (उदयपुर); हवा महल, आमेर दुर्ग, जंतर मंतर (जयपुर); मेहरानगढ़ (जोधपुर); जैसलमेर (सोनार) दुर्ग।
पूरा विषय है "वस्तु → स्थान"
परीक्षा में इसे ठीक इसी रूप में पूछा जाता है। तीनों सर्वाधिक उपयोगी समूहों का अभ्यास करें:
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परीक्षा सुझाव: बणी-ठणी → किशनगढ़ शैली। बेणेश्वर मेला → आदिवासी (भील)। पुष्कर → ऊँट मेला, अजमेर। ब्लू पॉटरी → जयपुर; थेवा → प्रतापगढ़।
स्वयं को परखें
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