जलवायु, मृदा व वनस्पति
राजस्थान की जलवायु एक तथ्य से निर्धारित होती है: अरावली मानसूनी हवाओं के आर-पार नहीं, बल्कि उनके समानांतर फैली है। अतः यह अरब सागर शाखा को ऊपर उठाकर वर्षा कराने में असमर्थ रहती है। दिशा की यही एक विशेषता बताती है कि पश्चिम मरुस्थल क्यों है और दक्षिण-पूर्व तुलनात्मक रूप से आर्द्र क्यों है।
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जलवायु प्रदेश
वर्षा दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर तेजी से घटती है — झालावाड़ में 100 सेमी से अधिक, तो जैसलमेर में 10 सेमी से भी कम।
| प्रदेश | वर्षा | जिले |
|---|---|---|
| शुष्क | 20 सेमी से कम | जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर |
| अर्ध-शुष्क | 20–40 सेमी | चूरू, नागौर, जोधपुर, पाली |
| उप-आर्द्र | 40–60 सेमी | जयपुर, अजमेर, टोंक, भरतपुर |
| आर्द्र | 60–100+ सेमी | झालावाड़, बांसवाड़ा, कोटा, डूंगरपुर |
पश्चिम शुष्क क्यों रहता है
तीन कारण मिलकर काम करते हैं, और परीक्षा में पहला सर्वाधिक पूछा जाता है:
ऋतुएँ
- ग्रीष्म (मार्च–जून) — अत्यधिक उच्च तापमान; फलौदी (जोधपुर) व बाड़मेर प्रायः राज्य का उच्चतम तापमान दर्ज करते हैं। गर्म शुष्क हवा लू कहलाती है।
- मानसून (जुलाई–सितंबर) — वार्षिक वर्षा का लगभग 90%; दक्षिण-पूर्व में पश्चिम की तुलना में कहीं अधिक।
- शीत (नवंबर–फरवरी) — ठंडी, शुष्क; माउंट आबू व फतेहपुर (सीकर) न्यूनतम तापमान दर्ज करते हैं। पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली हल्की शीतकालीन वर्षा मावठ कहलाती है और रबी फसल हेतु मूल्यवान है।
राजस्थान की मृदाएँ
वनस्पति
राजस्थान में वन क्षेत्र लगभग 9–10% है — राष्ट्रीय औसत से काफी कम।
- उष्णकटिबंधीय कँटीले वन — मरुस्थलीय पश्चिम; खेजड़ी, बबूल, केर।
- उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन — अरावली ढलान व दक्षिण-पूर्व; धोक, सालर।
- धोक राज्य में सर्वाधिक विस्तृत रूप से पाया जाने वाला वृक्ष है।
- खेजड़ी (प्रोसोपिस सिनेरेरिया) राज्य वृक्ष है, जिसे "मरुस्थल का कल्प वृक्ष" कहा जाता है; रोहिड़ा राज्य पुष्प है।
परीक्षा सुझाव: सर्वाधिक वर्षा = झालावाड़; न्यूनतम = जैसलमेर। सर्वाधिक तापमान = फलौदी; न्यूनतम = माउंट आबू। शीतकालीन वर्षा = मावठ; ग्रीष्म की गर्म हवा = लू। राज्य वृक्ष = खेजड़ी।