न्याय निगमन व कथन–निष्कर्ष
न्याय निगमन तर्कशक्ति का वह एकमात्र अध्याय है जहाँ आपका सामान्य ज्ञान बाधा है। प्रश्न यह पूछता है कि केवल दिए गए कथनों से क्या निकलता है — भले ही कोई कथन तथ्यतः असंगत हो ("सभी बिल्लियाँ पेड़ हैं"), आपको उसे मानकर उसी संसार के भीतर तर्क करना है। जो अभ्यर्थी वास्तविक जीवन से उत्तर देते हैं, वे ये अंक नियमित रूप से गँवाते हैं।
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न्याय निगमन — सही या गलत?
6 कथन · प्रति कथन 12 सेकंड
वृत्त बनाइए, शब्दों में मत सोचिए
हर न्याय निगमन एक चित्र है। चार प्रकार के कथन, चार चित्र:
| कथन | चित्र |
|---|---|
| सभी A, B हैं | वृत्त A पूरी तरह वृत्त B के भीतर |
| कोई A, B नहीं है | दो अलग वृत्त, एक-दूसरे को छूते नहीं |
| कुछ A, B हैं | दो वृत्त अतिव्यापी |
| कुछ A, B नहीं हैं | अतिव्यापन, पर A का कुछ भाग B के बाहर |
कोई निष्कर्ष तभी मान्य है जब वह हर संभव चित्र में सत्य हो। यदि आप ऐसा एक भी चित्र बना सकें जो कथनों पर खरा उतरे पर निष्कर्ष को तोड़ दे, तो वह निष्कर्ष नहीं निकलता।
कौन-से परिवर्तन वैध हैं?
क्या यह परिवर्तन मान्य है?
0/6कुछ A, B हैं → कुछ A, B नहीं हैं
इसे किस श्रेणी में रखेंगे?
विधि, क्रम से
कथन को उसके चित्र से मिलाइए
निष्कासन के नियम
परीक्षा सुझाव: यदि कोई निष्कर्ष किसी दिए गए कथन को केवल दोहराता है, तो वह स्वतः निकलता है। अभ्यर्थी प्रायः ऐसे निष्कर्षों को इसलिए ठुकरा देते हैं क्योंकि वे "बहुत आसान" लगते हैं।