भौतिक भूगोल: पृथ्वी व स्थलरूप
भौतिक भूगोल में सूचियाँ रटने से अधिक क्यों समझना काम आता है। यदि आप जानते हैं कि पृथ्वी का झुकाव 23.5° है और वही ऋतुओं का कारण है, तो संक्रांतियाँ, विषुव व दिन की लंबाई अलग-अलग याद करने के बजाय तर्क से निकाली जा सकती हैं।
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भौतिक भूगोल — सही या गलत?
6 कथन · प्रति कथन 12 सेकंड
पृथ्वी की संरचना
| परत | लगभग | ध्यान दें |
|---|---|---|
| भूपर्पटी | 5–70 किमी | सबसे पतली; महासागरीय भूपर्पटी महाद्वीपीय से पतली |
| मेंटल | ~2,900 किमी | सबसे मोटी परत; मैग्मा का स्रोत |
| बाह्य क्रोड | ~2,200 किमी | तरल; चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है |
| आंतरिक क्रोड | ~1,250 किमी | ठोस, मुख्यतः लोहा व निकल |
महत्वपूर्ण रेखाएँ
- भूमध्य रेखा — 0°, उत्तर व दक्षिण को बाँटती है
- कर्क रेखा — 23.5° उत्तर (भारत से गुजरती है)
- मकर रेखा — 23.5° दक्षिण
- आर्कटिक वृत्त — 66.5° उत्तर
- प्रधान याम्योत्तर — 0° देशांतर, ग्रीनविच से
23.5° का झुकाव ही कारण है कि कटिबंध ठीक वहीं हैं जहाँ हैं — वही संख्या दोनों जगह आती है, और यही ध्यान देने योग्य बात है।
परत के अनुसार छाँटिए
संख्याएँ पक्की कीजिए
निर्णय लीजिए, फिर जाँचिए
1/4पृथ्वी का अक्षीय झुकाव कितने अंश है?
25°
विधि, क्रम से
शब्द को उसके अर्थ से मिलाइए
त्वरित संदर्भ
परीक्षा सुझाव: संख्या 23.5 तीन बार आती है — अक्षीय झुकाव, कर्क रेखा और मकर रेखा। ये एक ही संख्या इसलिए हैं क्योंकि झुकाव ही कटिबंधों की स्थिति तय करता है। यह संबंध समझ लेने पर इन्हें अलग-अलग रटने की आवश्यकता नहीं रहती।