संघवाद व पंचायती राज
पंचायती राज लगभग पूरी तरह दो संशोधनों व कुछ संख्याओं के माध्यम से पूछा जाता है। 73वें संशोधन (1992) ने ग्रामीण स्थानीय शासन को संवैधानिक दर्जा दिया; 74वें ने शहरी निकायों के लिए वही किया। कौन-सा कौन है और उससे जुड़े आँकड़े जान लेना लगभग हर प्रश्न का उत्तर दे देता है।
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संघवाद व पंचायती राज — सही या गलत?
6 कथन · प्रति कथन 12 सेकंड
दोनों संशोधन
| 73वाँ संशोधन | 74वाँ संशोधन | |
|---|---|---|
| वर्ष | 1992 | 1992 |
| क्षेत्र | ग्रामीण — पंचायतें | शहरी — नगरपालिकाएँ |
| जोड़ा गया भाग | IX | IXA |
| अनुसूची | ग्यारहवीं (29 विषय) | बारहवीं (18 विषय) |
दोनों 1993 में लागू हुए। ग्यारहवीं अनुसूची में 29 विषय और बारहवीं में 18 हैं — ये दोनों संख्याएँ सीधे पूछी जाती हैं।
तीन स्तर
- ग्राम पंचायत — ग्राम स्तर
- पंचायत समिति — खंड या मध्यवर्ती स्तर
- ज़िला परिषद — ज़िला स्तर
ग्राम सभा कोई स्तर नहीं है: यह गाँव के सभी मतदाताओं का सामान्य निकाय है, और ग्राम पंचायत उसके प्रति उत्तरदायी होती है।
आरक्षण व कार्यकाल
- महिलाओं के लिए न्यूनतम एक-तिहाई स्थान आरक्षित
- अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण
- हर पंचायत का कार्यकाल: पाँच वर्ष
- राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कराता है
- राज्य वित्त आयोग हर पाँच वर्ष में इनकी वित्तीय समीक्षा करता है
ग्रामीण व शहरी छाँटिए
संख्याएँ पक्की कीजिए
विधि, क्रम से
विषय को उसके तथ्य से मिलाइए
त्वरित संदर्भ
परीक्षा सुझाव: यह जोड़ी पक्की कीजिए — 73 = ग्रामीण, 74 = शहरी, और अनुसूचियाँ 11 = 29 विषय, 12 = 18 विषय। ये चार संख्याएँ स्थानीय शासन के अधिकांश प्रश्न कवर कर लेती हैं।